Jan 17, 2015

अंधकारमय कल

Posted at  11:00 PM - by GIRDHARI BHARGAV 0

---: हिन्दुओं :--- अभी आसाम और बंगाल :---
फिर कल -- बारी आप की -- तब कहाँ जाओगे --??--
आज पुरे विश्व में इसाई समाज का 60 देशों में शासन चलता है।
दुनियां में मुसलमानों का भी 50 देशों पर राज है।
इन दोनों कोमो में सबसे पहले अपने धर्म के लोग और अपना धर्म होता है।
ये दोनों कोमे ही खुद के सामने हर धर्म को नीचा मानते है,
ये खुद को सारी दुनियां से ताकतवर और शासक वर्ग मानते है।
अगर इसाईयों और मुसलमानों को भारत से निकाल दे तो वो किसी दुसरे देश में जा सकता हैं, कहीं भी जाकर शरण और सहायता पा सकता है।
लेकिन यहाँ तो -- सारी गंगा ही उलटी बह रही है।
क्या आपने - कभी सोचा है:---
कहाँ जाओगे कहाँ आप को सहायता और शरण मिलेगी --??--
अब गिनती कीजिये - कहाँ कहाँ क्या हाल है :---
मामला बहुत “गम्भीर मोड़” तक पहुंच चुका है।
देश का कोई भी कोना बाकी नही है,
जहाँ ये “मुसल्ले उपद्रव” नही कर रहे हो।
कश्मीर से घाटी से हिन्दुओं को पूरी तरह से खदेड़ दिया गया,
केरल में भी हिन्दुओं का बहुत बुरा हाल है और चुन चुन कर हिंदूवादी नेताओं का मारा जाता है।
अब आसाम पूरे को आज में झोंक दिया गया,
दिन रात हिन्दुओ मारा और वहाँ से भगाया जा रहा है।
“केरल,कश्मीर और आसाम” तो आज भी इन के “पुरे कब्जे” में है।
आधा-तमिलनाडू,,आधा आंध्रप्रदेश,,आधा उतरप्रदेश,,आधा-बिहार,
बंगाल पूरा जल रहा है।
इन सभी इलाकों में इन्ही की “तूती” बोलती है।
अब बाकी बचे देश के दुसरे हिस्सों में भी ये चुप नही बैठे है।
चाहे “हरियाणा हो चाहे राजस्थान हो”,,
“चाहे महाराष्ट हो,और चाहे कर्नाटक हो”,
कुछ जगहों से भी इन चारों प्रदेशों से हिन्दुओं को भगाया जा चूका है।
इन लोगो की “भयंकर तैयारियां” “रात और दिन” चल रही है-
क्यों की :-- इन को – “अरब देशों” - से “असीमित-दौलत” मिल रही है-
हिन्दू समाज सिर्फ भारत में ही है।
विश्व में हिन्दू समाज के लिए कहीं कोई दूसरी जगह नही है।
आज आसाम पूरा जल रहा है:---
असम में एनडीएफबी (एस) उग्रवादियों के हमले के बाद करीब 2.9 लाख लोग असम के चार जिलों में राहत शिविरों में रह रहे हैं।
सरकारी सूचनाओं के अनुसार :----
लगभग 2.86 लाख लोग कोकराझाड़, सोनितपुर, चिरांग और उदलगुरी जिलों में 139 राहत शिविरों में रह रहे हैं।
विस्‍थापन के मामले में :--- असम ने "सीरिया और इराक" को भी पीछे छोड़ा..
बीते साल हिंसा के चलते पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा आंतरिक विस्थापन असम में हुआ। शुक्रवार को एशियन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स (एसीएचआर) की जारी एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
सोचो - अगर अगर तुम एक न हुए तो :---
ऐसा वक्त आने में न तो समय लगेगा और न किसी को कुछ करना पड़ेगा क्योकि जिम्मेदार हम खुद हैं इन सबके..।
सरिता शर्मा जी के वाल से साभार :---
असम में ईसाई मिशनरियों ने धर्म परंपरा के लोगों पर हमला कर फिर से सिद्ध कर दिया है कि रोमन चर्च काल्पनिक ईसा के चरित्र का क्रॉस लेकर पूरे विश्व को कब्जा करने के लिए पुराने ढंग पर ही चल रहा है।
यही स्थिति तमिल नाम के टाइगर की थी जो ईसाई मिशनरियों के आतंकी संगठन तमिल की आढ़ में चलाते हुए हिंसा कर रहा था।
मीडिया का समाचार को हल्का करने उसे आदिवासी समूह से जोड़ने के ढंग से समझा जा सकता है। यह वही मीडिया है जो कुछ दिन पहले हम हैं पाक के नारे मोमबत्तियां बौद्धिकता झाड़ रहा था।
दलित चिंतकों, वामपंथियों से लेकर जेहादी तक इसे जिस तरह से पलटेंगे वह इनके चरित्र को दिखा देगा।
खबरदार कोई क्रिसमस नाम से धर्म परंपरा के उत्तरायण पर्व को ईसाई गिरोहों के नाम पर कुछ भी बोले। अग्निसाक्षी है धर्म परंपरा के लोगों को जलाने की मारने की उनकी धरती समृद्धि संस्कृति को लूट कर क्रॉस (काटा) लगाने की।
बेशर्मी से ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य को शूद्रों के साथ दुर्व्यवहार करने के लिए झूठी कहानियाँ सुनाने वालों कब हुआ है भारत में नर संहार किस पंथ संप्रदाय ने मौत के मुंह में किसी को डाला है। आज तक दलित की घर वापसी के लिए एक भी दलित चिंतक कहने वाला घर से निकल कर अपने बंधु को जो एक तरफ सरकार को कुछ कहता है और समाज में पहचान कुछ बताता है को घर वापसी कराई है।
धर्म परंपरा वह है जो भेद नहीं करती है भिन्नता का सम्मान करती है तथा
ममेश्वर है यह तीन इब्राहिम के नाम लेने वाले मूसा ईसा मोहम्मद के गिरोह जो हिंसा आतंक से धरती को कब्जाते हैं। इसके साथ-साथ चिल्लाते हैं कि शांति स्वर्ग के ठेकेदार हम ही हैं और कोई देश हमें न रोकें।
पहचान लो कि इनके एक ईश्वर शैतान को...
नीचे दिया लिंक एक बार जरूर खोल कर देखिए, आपके सोए रहने के कारण कब अहिंसा पर चलते हुए आप आतंकवादी हो गए और मुस्लिम-ईसाई हिंसक होते हुए भी कब शांति के दूत और प्रगतिशील हो गए, आपको पता भी नहीं चला! और ऐसे ही सोए रहे तो आपके बच्चों को भी इसका पता नहीं चलेगा...!
मतांतरण पर कानून बनाने के नाम पर ईसाई समुदाय के लोगों ने विरोध किया है और संसद में चर्चा तक नहीं हो सकती है।
बायकाट कर राज्य सभा कार्य रोकने वाले नहीं चाहते कि कानून बने।
राज्य पुलिस प्रशासन लागू करने के लिए जिम्मेदार होता है और सीमावर्ती इलाकों में भी अर्द्धसैनिक बलों को तैनात करने का विरोध किया जा रहा है।
मोदी जी ने बंगाल में मदरसों में हुए बम विस्फोटों के लिए जो कदम उठाए हैं उनके विरुद्ध मदरसा राजनीति के नंगेपन को देखें ममता बनर्जी के घोटालों में फंसने की बात पर ही राज्य के प्रतिनिधि मंडल गायब हो जाते हैं।
हम समस्याओं को सामने लाने के लिए समाज को जोड़ने के लिए विचार कर रहे हैं।
असम में हिंसा के बाद सेवा भारती सेवा कार्य में सक्रिय।
असम में एनडीएफबी (एस) उग्रवादियों के हमले के बाद करीब 2.9 लाख लोग असम के चार जिलों में राहत शिविरों में रह रहे हैं।
सरकारी सूचनाओं के अनुसार :----
लगभग 2.86 लाख लोग कोकराझाड़, सोनितपुर, चिरांग और उदलगुरी जिलों में 139 राहत शिविरों में रह रहे हैं।
सेवा भारती के कार्यकर्ता इन शिविरों में आवश्यक वस्तुओं का वितरण कर रहे हैं।
आसाम मदरसों में हथियारों की ट्रेनिग
भारत में ज्ञान प्राप्तd करने और भारत में ही शरीर त्याaगने वाले ईसा मसीह की वास्तhविकता पर ईसायत मौन!
इन संगठनों के पीछे ईसाई मिशनरी को साबित करते प्रमाणित लिंक देख सकते हैं।
कुछ लोग ईसाई मिशनरी के लिए प्रमाण चाहते हैं।
http://www.satp.org/.../assam/terrorist_outfits/ndfb.htm
LTTE के विषय में ऐसा भ्रम है कि वो हिन्दू तमिल आतंकियों का ग्रुप था।
जबकि सच ये है कि जिन तमिल इसाई नेताओं ने इस आन्दोलन को खड़ा किया था।
उन्हें ही मारकर इसके क्रिस्चियन ग्रुप ने पूरे संघठन को अपने हाथ में लेकर चर्च और विदेशी हथियारों के बल सबसे हिंसक आतंकी संघठन बना दिया।
LTTE के सभी बड़े नेता और प्रमुख क्रिस्चियन थे लेकिन तमिल के नाम पर अन्य हिन्दू तमिलों को अपनी सेना में शामिल करते रहे ।
हिन्दू तमिल अपने क्रिस्चियन तमिल नेताओं के अलगाववादी बातों में आकर उनके आतंकी गतिविधियों का हिस्सा बन गए फिर फिर श्रीलंका की सेना द्वारा दर्दनाक नरसंहार में मारे गए।
उसी तरह चर्च के कांसेप्ट पर बोडो , मणिपुर , नागालैंड के आतंकी संघठन अलगावादी हिंसा कर रहे है ।
असम में हिन्दू सत्तर लोग काल की कोख में चले गये सब चुप हैं
कुछ लोगों की संवेदनाएं भी बस अन्तराष्ट्रीय रह गयी हैं !!
भारत में ज्ञान प्राप्त करने आये और भारत में ही शरीर त्याग ने वाले ईसा मसीह की वास्तविकता पर ईसायत मौन!
इन संगठनों के पीछे ईसाई मिशनरी को साबित करते प्रमाणित लिंक देख सकते हैं
कुछ लोग ईसाई मिशनरी के लिए प्रमाण चाहते हैं
भारत के पश्चिम बंगाल में मुस्लिम बहुल इलाके में हिन्दुओ के श्मशान में अब शव जलाने पर भी पुलिस और मुल्लो परमिशन अनिवार्य---
http://hinduexistence.org/…/hindu-cremation-needs-islamic-…/
http://www.hindujagruti.org/…/20219_hindu-cremation-needs-i…http://www.hindujagruti.org/…/20219_hindu-cremation-needs-i…http://www.hindujagruti.org/…/20219_hindu-cremation-needs-i…
आसाम से लगते – बंगाल का भी हाल जान लीजिये
दुनिया में कब क्या हुआ ये भी जान लीजिये
https://www.facebook.com/photo.php?fbid=344360035727450&set=a.160206300809492.1073741827.100004603693483&type=1&theater&notif_t=like
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मुझे नही लगता -- सभी मित्र-- इतने लिंक देख पाएंगे।
-- गिरधारी भार्गव --4.1.2015---:

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