Jun 13, 2020

javik Kheti organic food agriculture

Posted at  3:12 AM - by Admin 0

लोग बीमार क्यों पड़ रहे हैं❓ज्यादा हॉस्पिटल व हर गली मोहल्ले में मेडिकल स्टोर क्यों खुल रहे हैं? ? ? 

 क्या कारण है कि हमारे पूर्वज स्वस्थ जीवन बिताते व लम्बी आयु जीते थे और अब एक व्यक्ति चालीस की उम्र में ही बीमार पड़ने लगता है और रोगों से घिर जाता है कम उम्र में सफेद बाल, नजर से कम दिखना तो आम बात हो गई है और कैंसर, हार्टअटैक के आये दिन मालमे सामने आ रहे है।

पूर्वकाल में हमारे पूर्वजो, दादा परदाओ ने जीवन के तीनो तत्व शुद्ध ग्रहण किये वे है 
1. भोजन 
2. पानी 
3. हवा  
4. चौथा तत्व जो अंत मे बताउगा। 

पहला है
1. *भोजन* : वे जो भोजन गृहण करते थे वह पूर्णता जैविक व शुद्ध होता था *गेहूं में यूरिया नही था* अन्य अनाजों में  *रासायनिक खाद नहीं था* और *फल फ्रूट व सब्जी में पेस्टिसाइड, केमिकल नहीं होता था* ओर जो मांसाहारी थे वे डेढ़ साल में बड़ा हुआ मुर्गा खाते और अब डेढ़ महीने में बड़ा हुआ खाते हैं ओर हा गाय के घी में भी यूरिया पाया जाता है 

दूसरा है 
2. पानी :- जल का जीवन का महत्वपूर्ण भाग हैं पूरी पृथ्वी पर व शरीर में 70% से अधिक जल है 
पहले जो जल था वह पूर्णता स्वच्छ था आज हम जो पानी पी रहे हैं वह हमें को बांध, डेम, कुए, हैंडपंप, ट्यूबेल से आता है वह इनका जलस्तर बारिश के बाद बढ़ता है और बारिश होती है बादलों से जिसमे फैक्टरियों व वाहनों का धुंआ है (कार्बन मोनोऑक्साइड आदि कैमिकल गैस) उससे प्रदूषित अम्लीय वर्षा होती है 
यह वर्षा जल  पहले ही प्रदूषित होता है  और जब पानी खेतों पर गिरता है तो केमिकल और पेस्टिसाइड व रासायनिक खाद आदि को अपने साथ लेकर धरती में व नदी नालों के द्वारा हमारे जल स्रोतों कुए, हैंडपम्प आदि में पहुंच जाता है और वही पानी हम पीते हैं जो कि आजकल बगैर प्यूरीफायर के पीना रोगों को दावत देने जैसा हो गया है ।
 क्योकि पानी का एक सर्वश्रेष्ठ गुण है अगर वह अशुद्ध है तो जब वह गुजरेगा तो अशुद्धता को छोड़कर शुद्ध हो जाएगा और अगर वह शुद्ध है तो वह बहते हुए सारी अशुद्धता अपने साथ ले जाएगा यही हमारे शरीर में भी होता है अगर हम शुद्ध पानी पीते हैं तो वह सारी अशुद्धि हमारे शरीर से निकाल देता है और अगर हम अशुद्ध जल पीते हैं तो वह जल की सारी अशुद्धियां  (फ्री रेडिकल्स) शरीर में छोड़ कर शुद्ध निजल जाता है जिसको फ्री रेडिकल्स कहते ओर ये फ्रेरेडिकल्स हमारे शरीर में जम जाते हैं और शुगर, हार्टअटैक , BP, ज्वाइंट पेन,कमर दर्द इत्यादि रोगों को जन्म देते हैं। अगर पानी शुद्ध होगा तो ये फ्री रेडिकल्स हमारे शरीर से निकल जाते हैं शुद्ध पानी से यह डिटॉक्स हो जाते हैं।  पानी को व्यर्थ ना बहावे।


तीसरा है 
3- वायु : हाव - आज जो वायु प्रदूषण है वह चरम सीमा पर फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं गाड़ी और वाहनों से निकलने वाला धुआं और केमिकल गैसों के द्वारा उत्पन्न किया गया वायु प्रदूषण, साथ ही जंगल कम हो रहे हैं और पेड़ों को लगातार काटा जा रहा है जिससे ऑक्सीजन का उत्सर्जन भी कम हो रहा है व जो अक्सीजन है या जो वायु है वह भी शुद्ध नहीं है आप और हम तो अपनी जिंदगी निकाल लेंगे लेकिन इसी तरह पेड़ों का दोहन चलता रहा तो आने वाली पीढ़ी को ऑक्सीजन सिलेंडर व एयर प्यूरीफायर के सहारे ही जीना पड़ेगा ।
इसके विपरीत हमारे पूर्वजों को शुद्ध वायु मिली ।


चौथा तत्व 
4. कार्यप्रणाली क्रियाकलाप अब में चौथा तत्व बताता हूं जिसका मैंने अंत में जिक्र करने का कहा था वह तत्व है हमारी नित्य क्रिया और कर्म हम जो कर्म पहले करते थे वह फिजिकल होते थे और आजकल जो कार्य किए जा रहे हैं वो मशीनों से किया जा रहा है जैसे कि पहले हम बाजार जाते थे तो पैदल जाते थे या साइकिल से और अब मोटरसाइकिल या कार से जाते हैं जिससे हमारा पैदल चलना ना के बराबर हो गया इसी तरह ग्रहणी पहले आटा खुद चक्की से पिसती थी अब मशीनों से व मसाले मिक्सर से पिसे  जा रहा है एवं सारे क्रियाकलाप बंद हो गए व्यायाम करना इंसान ने लगभग बंद ही कर दिया या तब करता है जब वह रोगों से घिर जाता है। 

*यहीं सब कारण है कि कम उम्र में लोग बीमार पड़ रहे हैं और ज्यादा मेडिकल वह हॉस्पिटल खुल रहे हैं।*



प्रकृति का भी एक नियम है  give And take जैसा दोगे वैसा पाओगे जितना दोहन करोगे उतना ही पाओगे ज्यादा कर लोगे तो नहीं मिलेगा कम करोगे तो मिलता रहेगा इसलिए कृपया प्रकृति से जुड़े और ऑर्गेनिक व जैविक खेती को बढ़ावा दें यह किसान का कर्तव्य नहीं है यह हर उस व्यक्ति का कर्तव्य है जो सामान खरीदना है दिन भारत के हर एक व्यक्ति जैविक वस्तुओं का उपभोग करने लगेगा उस दिन से भारत का हर किसान जैविक उत्पादन करने लगेगा।

अगर गिव एंड टेक का प्रकृति का नियम हमने जारी नहीं रखा ओर केवल लेते रहे तो आनेवाली पीढ़ी को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी इसलिए ज्यादा से ज्यादा प्रकृति को दें चाहे पेड़ लगाने के रूप में हो, चाहे जैविक खेती के रूप में, या जैविक उत्पाद के उपभोग के रूप मे, आप अपना एक छोटा सा योगदान अवश्य दें... जय धरती माँ। जय माँ अन्नपूर्णा। 

मेरा यह लेख प्रकृति को समर्पित व धारती माँ के श्री चरणों मे अर्पित है लेख में कोई त्रुटि रह गई हो तो क्षमा करें🙏 कु. मयंक प्रताप सिंह मुवालिया

About the Author

Write admin description here..

0 comments:

Contact Us

Name

Email *

Message *

Followers

WP Theme-junkie converted by Blogger template